गेहूं की दूसरी सिंचाई पर कल्लों की संख्या बढ़ाने का चमत्कारिक फॉर्मूला और खाद प्रबंधन. गेहूं की फसल में बिजाई और पहली सिंचाई के बाद यदि उर्वरकों के प्रबंधन में कोई कमी रह गई है, तो दूसरी सिंचाई का समय उस कमी को पूरा करने का अंतिम अवसर होता है। आमतौर पर जब गेहूं की फसल 40 से 50 दिन की हो जाती है, तब दूसरी सिंचाई की जाती है। फसल में जितने अधिक कल्ले निकलेंगे, उतनी ही अधिक बालियां आएंगी और पैदावार में वृद्धि होगी। इस समय सही खाद डालने से पौधे की पत्तियां चौड़ी और गहरा हरा रंग लिए हुए निकलती हैं, जो फसल के बेहतर स्वास्थ्य का संकेत है।
दूसरी सिंचाई के समय यूरिया का प्रयोग सबसे महत्वपूर्ण है। एक एकड़ गेहूं की पूरी फसल के लिए कुल 100 से 120 किलो यूरिया की आवश्यकता होती है। यदि आपने बिजाई और पहली सिंचाई के दौरान कुछ हिस्सा डाल दिया है, तो शेष 30 से 45 किलो यूरिया इस समय जरूर डालें। यूरिया नाइट्रोजन का मुख्य स्रोत है जो क्लोरोफिल बनाने में मदद करता है, जिससे कल्ले तेजी से निकलते हैं। ध्यान रहे कि इसके बाद यूरिया डालने का अधिक लाभ नहीं मिलता, इसलिए यह सबसे सही समय है।
यूरिया के साथ ‘सीवीड’ (Seaweed) फर्टिलाइजर का संयोजन कल्लों की संख्या बढ़ाने के लिए एक बूस्टर की तरह काम करता है। सीवीड पौधों के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है और फसल में जबरदस्त हरापन लाता है। यदि आप शुद्ध सीवीड पाउडर (80-100% वाला) इस्तेमाल कर रहे हैं, तो प्रति एकड़ 1 किलो की मात्रा यूरिया में मिलाकर खेत में बिखेर दें और फिर पानी लगा दें। यह सरल फॉर्मूला उन खेतों के लिए रामबाण है जहाँ हर्बिसाइड (खरपतवार नाशक) के इस्तेमाल से फसल को झटका लगा हो या उसकी बढ़वार रुक गई हो।
यदि फसल में पीलापन अधिक है या आप और भी बेहतर परिणाम चाहते हैं, तो पानी लगाने के 1-2 दिन बाद एक विशेष स्प्रे करना चाहिए। इस स्प्रे के लिए 200 लीटर पानी में 1 किलो यूरिया, 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 500 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट और 500 ग्राम फेरस सल्फेट का घोल तैयार करें। पौधे की मजबूती और दाने की अच्छी क्वालिटी के लिए इसमें आधा किलो बुझे हुए चूने का पानी (कैल्शियम के लिए) भी मिलाया जा सकता है। यह स्प्रे शाम के समय करने से सबसे अच्छे परिणाम मिलते हैं।
संक्षेप में कहें तो, गेहूं की दूसरी सिंचाई पर किया गया सही खाद प्रबंधन ही आपकी मेहनत को भरपूर पैदावार में बदल सकता है। यूरिया, सीवीड और सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, मैग्नीशियम, फेरस) का संतुलित मेल न केवल कल्लों की संख्या बढ़ाता है, बल्कि फसल को तनाव (Stress) से भी बाहर निकालता है। इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर किसान भाई गेहूं की खेती से रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।